अलविदा सनशाइन

एक बहुत बीमार “सनशाइन” तीन दिन तक अनशन पर रही – आख़िर दिल पर पत्थर रख कर हमने “सनशाइन” को उसी स्वर्ग में भेज दिया, जहाँ हमारे जिगर के सब से प्यारे टुकड़े हमारा इंतिज़ार करते होंगे 😥 … More अलविदा सनशाइन

काव्य-शास्त्र के नियमानुसार शब्दावली

मात्रा, लय, यति, गति, आदि को ध्यान में रखकर की गई काव्य रचना को छन्द कहते हैं – कुछ मूल बातें छन्द, और काव्य के बारे में… … More काव्य-शास्त्र के नियमानुसार शब्दावली

कविता में एक पल को कैसे बांधना है?

कोविड की पट्टी आँखों से, उतरी जैसे ही, हिरनी भी आ पहुँची अँगना, चिड़िया भी चहकी! एक शाम अपने आंगन में निकली और एक ऐसा नज़ारा देखने को मिला कि तुरंत एक नवगीत उमड़ पड़ा! आधे मिनट में जैसे तैसे एक हिलते-डुलते फोन में उस मंज़र को कैद कर के यू-ट्यूब पर लगाया है – सिर्फ वह पल याद रखने के लिए जिस में दिल की कलम चल निकली थी! … More कविता में एक पल को कैसे बांधना है?

हाइबुन: मेरी खट्ट-मिट्ठी

आज वो खट्टी-मीठी यादें क्यूँ घेर रही हैं? वो दिसम्बर का जाड़ा, जब तुम कंबल में साथ न होतीं तो मैं दाँत किटकिटाती ही मर जाती। [एक हाल ही में लिखा हाइबुन पेश है – जिसमें गद्य और हाइकु का सम्मिश्रण होता है!] … More हाइबुन: मेरी खट्ट-मिट्ठी

क़तआ’त

यूँ रौशनी से बदगुमान न हो,
तू अंधेरों से छला जाएगा,
ये साया दो-पहर का साथी है,
रात होते ही चला जाएगा!
[ये सब उसी डाइरी के पन्नों में मिले जो 1993 में गुम हुई थी।] … More क़तआ’त

मुझे पागल करार कर दिया गया है

यह पन्ना मुझे अपनी पुरानी डायरी में मिला है – 1997 – की तारीख भी है! नहीं जानती कि ये कविता है या कहानी, अधूरी है कि पूरी? फैसला आप कीजिये, चाहें तो अपने तरीके से पूरी कर दीजिये! … More मुझे पागल करार कर दिया गया है