लिंग: यह शब्द स्त्रीलिंग है या पुल्लिंग?

कुछ मूल बातें:

  1. ‘लिंग’ का शाब्दिक अर्थ प्रतीक या चिह्न अथवा निशान होता है।
  2. संज्ञाओं के जिस रूप से उसकी पुरुष या स्त्री जाति का पता चलता है, उसे ‘लिंग’ कहा जाता है। तो लिंग दो प्रकार के होते हैं: स्त्रीलिंग [जो स्त्री-जाति का बोध कराता है।] और पुल्लिंग [जो पुरुष-जाति का बोध कराता है।]
  3. नपुंसक लिंग: पुल्लिंग और स्त्रीलिंग से इतर तीसरा लिंग जिसके अंतर्गत ऐसे पदार्थ आते हैं जिन्हें पुल्लिंग या स्त्रीलिंग के अंतर्गत नहीं रखा जा सकता [अँग्रेज़ी व्याकरण में ऐसी स्थिति को न्यूटर जेंडर के अंतर्गत रखा जाता है]।
  4. हिन्दी भाषा में संज्ञा शब्दों के लिंग का प्रभाव उनके विशेषणों तथा क्रियाओं पर पड़ता है। इस दृष्टि से भाषा के शुद्ध प्रयोग के लिए संज्ञा शब्दों के लिंग-ज्ञान अत्यावश्यक हैं।
  5. हम शब्द का उच्चारण किस प्रकार करते रहे हैं उसी से उन शब्दों के लिंग स्थापित हुए हैं, यानी हम किसी हिंदी शब्द का लिंग इसी आधार पर जान सकते हैं कि हम उसे कैसा लिखते, पढ़ते या सुनते रहे हैं, जैसे:
    • अगर पुरुषत्व को ध्यान में रखकर उच्चारण करते हैं तो शब्द पुल्लिंग लगता है।
    • चाय स्त्रीलिंग है, यह हम इसीलिए जानते हैं कि रोज़मर्रा के वार्तालाप या लिखने-पढ़ने में यह शब्द स्त्रीलिंग के रूप में ही इस्तेमाल होता है [चाय ‘अच्छी’ है, मुझे ‘कड़ी’ चाय पसंद है, चाय बन ‘गई’, चाय पी ‘ली’ आदि।]
  6. वैयाकरणों ने विभिन्न साहित्यकारों और आम लोगों के भाषा-प्रयोग और रुप [यानी शब्दों की व्याकणिक बनावट] के आधार पर कुछ लिंग निर्धारण नियम बनाए हैं।

लिंग निर्धारण नियम


नियम: प्रयोग के आधार पर

यानी संज्ञा शब्द के साथ प्रयुक्त विशेषण, कारक चिह्न एवँ क्रिया के आधार पर, जैसे:

  1. अच्छा लड़का, अच्छी लड़की। (लड़का पुल्लिंग, लडक़ी स्त्रीलिंग)
  2. राम ने रोटी खाई। (रोटी स्त्रीलिंग, क्रिया स्त्रीलिंग)
  3. राम ने आम खाया। (आम पुल्लिंग, क्रिया पुल्लिंग)

नियम: अर्थ के आधार पर

कुछ शब्द अर्थ की दृष्टि से समान होते हुए भी लिंग की दृष्टि से भिन्न होते हैं, जैसे: कवि-कवियत्री, महान-महती, लेखक-लेखिका। ऐसे शब्दों का सही प्रयोग करने पर ही शुध्द वाक्य बनता है, जैसे:

  1. आपकी महान कृपा होगी। (अशुद्ध)
    • आपकी महती कृपा होगी। (शुद्ध)
  2. वह एक विद्यावान लेखिका है। (अशुद्ध)
    • वह एक विदूशी लेखिका हैं। (शुद्ध)

नियम: शब्दांत में कौन सा स्वर है, इस के आधार पर

शब्दांत के आधार पर स्त्रीलिंग

  1. आकारान्त शब्द, जैसे: लाता, रमा, ममता आदि।
  2. इकारारान्त शब्द, जैसे: रीति, तिथि, हानि [अपवाद: कवि, रवि पुल्लिंग]
  3. ईकारान्त शब्द भी, जैसे: कली, नाली, गाली, जाली, सवारी, तरकारी, सब्जी, सुपारी, साड़ी, नाड़ी, नारी, टाली, गली, भरती, वरदी, सरदी, गरमी, इमली, बाली, नदी, रोटी, टोपी आदि। [अपवाद: हाथी, दही, पानी, मोती, घी, जी – ईकारान्त होते हुए भी पुल्लिंग]
  4. ख, आई, हट, वट, ता आदि अन्तवाली संज्ञाएँ, जैसे: राख, भीख, सीख, भलाई, बुराई, ऊँचाई, गहराई, सच्चाई, आहट, मुस्कराहट, घबराहट, झुंझलाहट, झल्लाहट, सजावट, बनावट, मिलावट, रूकावट, थकावट, स्वतंत्रता, पराधीनता, लघुता, मिगता, शत्रुता, कटुता, मधुरता, सुन्दरता, प्रसन्नता, सत्ता, रम्यता, अक्षुण्णता।
  5. अरबी–फारसी उर्दू के ‘त’ अन्तवाली संज्ञाएँ, जैसे: मोहब्बत, शोहरत, इज्जत, जिल्लत, किल्लत, शरारत, हिफाजत, इबादत, नसीहत, बगावत, हुज्जत, जुर्रत, कयामत, नजाकत, गनीमत, तमिल, गुजराती, ग्रीक, बाँगडू, सम्पूर्ण, हिन्दी, व्याकरण, और रचना।
  6. आ, ई, उ, ऊ अन्तवाली संज्ञाएँ, कुछ स्त्रीलिंग, कुछ पुल्लिंग होती हैं जैसे ये सभी स्त्रीलिंग हैं: प्रार्थना, दया, आज्ञा, लता, माला, भाषा, कथा, दशा, परीक्षा, पूजा, कृपा, विद्या, शिक्षा, दीक्षा, बुद्धि, रुचि, राशि, क्रांति, नीति, भक्ति, मति, छवि, स्तुति, गति, स्थिति, मुक्ति, रीति, नदी, गठरी, उदासी, सगाई, चालाकी, चतुराई, चिट्ठी, मिठाई, मूंगफली, लकड़ी, पढ़ाई, ऋतु, वस्तु, मृत्यु, वायु, बालू, लू, झाडू, वधू।

शब्दांत के आधार पर पुल्लिंग

  1. अकारान्त और आकारांत शब्द, जैसे: राम, सूर्य, समुद्र, कपड़ा, घोड़ा आदि।
  2. जिन शब्दों के अन्त में त्र, न, ण, ख, ज, आर, आय, हों
    • त्र – मित्र, पत्र, चित्र।
    • – सदन, वदन, बदन, भोजन, पालन [अपवाद (यानी स्त्री०): थकन, लगन]।
    • – व्याकरण, भरण, हरण, सम्पूर्ण, जागरण, पोषण।
    • – सुख, दुःख, रुख़ [अपवाद (यानी स्त्री०): चीख, सीख]।
    • – मनोज, भोज, अनाज, ताज, समाज, ब्याज [अपवाद (यानी स्त्री०): खोज, मौज खाज, लाज]।
    • आर – प्रकार, द्वार, शृंगार, विहार, आहार, संचार, आचार, विचार, प्रचार, अधिकार, आकार [अपवाद (यानी स्त्री०): हार, हुंकार, बौछार, जयजयकार]।
    • आय – अध्यवसाय, व्यवसाय, अध्याय, न्याय [अपवाद (यानी स्त्री०): हाय गाय राय]।
  3. आ, ई, उ, ऊ अन्तवाली संज्ञाएँ, कुछ स्त्रीलिंग, कुछ पुल्लिंग होती हैं जैसे ये सभी पुल्लिंग हैं:
    • कुर्ता – कुत्ता – बूढ़ा
    • शशि – रवि – यति –
    • कवी – हरि – मुनि –
    • ऋषि – पानी – दानी
    • घी – प्राणी – स्वामी
    • मोती – दही – गुरु
    • साघु – मधु – आलू
    • काजू – भालू – आँसू

नियम: शब्द की रचना में किन प्रत्यय का प्रयोग हुआ है, उस के आधार पर

स्त्रीलिंग ता, आस, अट, आई, ई, इमा, इया, आवट, आहट प्रत्यय वाली भाववाचक संज्ञाएँ, जैसे:

  • डिबिया
  • मनुष्यता, सुंदरता
  • मिठास
  • घबराहट, मिलावट, बनावट
  • लिखाई, लड़ाई, गर्मी, दूरी, प्यास बढ़ाई

पुल्लिंग

  1. त्व, पन, पा, व, य आव, ना, खा प्रत्यय वाली भाववाचक संज्ञाएँ, जैसे:
    • शिवत्व – मनुष्यत्व – गुरुत्व – पशुत्व
    • लड़कपन– बचपन
    • बुढ़ापा
    • गौरव
    • शौर्य
    • घुमाव
    • पागलखाना
  2. संस्कृत के या उससे परिवर्तित होकर आए अ, इ, उ प्रत्ययान्त पुल्लिंग और नपुं० शब्द हिन्दी में भी प्रायः पुल्लिंग ही होते हैं, जैसे: जग, जगत्, जीव, मन, जीत, मित्र, पद्य, साहित्य, संसार, शरीर, तन, धन, मीत, चित्र, गद्य, नाटक, काव्य, छन्द, अलंकार, जल, पल, स्थल, बल, रत्न, ज्ञान, मान, धर्म, कर्म, जन्म, मरण, कवि, ऋषि, मुनि, संत, कांत, साधु, जन्तु, जानवर, पक्षी।

नियम: उभयलिंगी शब्द [इनका प्रयोग दोनों लिंगों में होता है], जैसे:

  1. तार आया है। – तार आई है।
  2. पवन सनसना रही है। – पवन सनसना रहा है। [पवन पुल्लिंग या स्त्रीलिंग?]
  3. दही खट्टी है। – दही खट्टा है।
  4. साँस चल रही थी। – साँस चल रहा था।
  5. मेरी कलम अच्छी है। [हिंदी में] – मेरा कलम अच्छा है। [उर्दू में]
  6. रामायण लिखी गई। – रामायण लिखा गया।
  7. उसने विनय की। – उसने विनय किया।

नोट: प्रचलन में आत्मा, वायु, पवन, साँस, कलम, रामायण आदि का प्रयोग स्त्रीलिंग में तथा तार, दही, विनय आदि का प्रयोग पुल्लिंग मे होता है। हमें प्रचलन को ध्यान में रखकर ही प्रयोग में लाना चाहिए।


नियम: तत्सम एवं विदेशज शब्द हिन्दी में लिंग बदल चुके हैं:

शब्द – तस्सम/विदेशज लिंग – हिन्दी में लिंग

  1. महिमा – पुं० – स्त्री०
  2. आत्मा – पुँ०– (आतमा) स्त्री०
  3. देह – पुं० – स्त्री०
  4. देवता – स्त्री० – पुं०
  5. विजय – पुं० – स्त्री०
  6. दुकान – स्त्री० – (दूकान) पुं०
  7. मृत्यु – पुं० – स्त्री०
  8. किरण – पुँ० – स्त्री०
  9. समाधि – पुँ० – स्त्री०
  10. राशि – पुँ० – स्त्री०
  11. ऋतु – पुँ० – स्त्री०
  12. वस्तु – नपुं० – स्त्री०
  13. आयु – नपुं० – स्त्री०

आम प्रयोग होने वाले स्त्रीलिंग शब्द

  1. सभी नदियों के नाम, जैसे: गंगा, यमुना, कावेरी, कृष्णा, गंडक, कोसी आदि [अपवाद: ब्रह्मपुत्र, सिंधु और सोन]
  2. हिन्दी तिथियों के नाम, जैसे: प्रतिपदा, द्वितीया, षष्ठी, पूर्णिमा आदि।
  3. भाषाओं तथा बोलियों के नाम, जैसे: हिन्दी, संस्कृत, अंग्रेजी, बंगला, मराठी, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, सिंधी, उर्दू, अरबी, फारसी, चीनी, फ्रेंच, लैटिन, ब्रज, अपभ्रंश, प्राकृत, बुंदेली, मगही, अवधी, भोजपुरी, मैथिली, पंजाबी।
  4. कुछ प्राणिवाचक शब्द [इन का पुंल्लिंग रूप बनता ही नहीं], जैसे: सुहागिन, सौत, धाय, संतति, संतान, सेना, सती, सौतन, नर्स, औलाद, पुलिस, फौज, सरकार।
  5. कुछ प्राणिवाचक जोड़ों वाले शब्द नित्य स्त्रीलिंग होते हैं मगर इन के स्त्रीलिंग–पुंल्लिंग रूप को स्पष्ट करने के लिए नर-मादा का प्रयोग करना पड़ता है, जैसे: नर चील, नर मक्खी, नर मैना, – मादा रीछ, मादा खटमल आदि।
    • दीमक – चील – लूँ
    • मछली – गिलहरी –
    • तितली – कोयल – मकड़ी
    • छिपकली – चींटी – मैना
  6. अंग्रेजी भाषा से आए स्त्रीलिंग शब्द, जैसे: ग्राउंड, यूनिवर्सिटी, बस, जीव, कार, ट्रेन, बोतल, पेंट, पेंसिल, फिल्म, फीस, पिक्चर, फोटो, मशीन।
  7. अरबी–फारसी से आए स्त्रीलिंग शब्द, जैसे: दीवार, दुनिया, दवा, शर्म, दुकान, सरकार, हवा, फिजाँ, हया, गरीबी, अमीरी, लाचारी, खराबी, लाश, तलाश, बारिश, शोरिश, वफादारी, मजदूरी, कशिश, कोशिश।
  8. प्राणियों के स्त्रीलिंग समूह, जैसे: सभा – जनता – सरकार – प्रजा – समिति – फौज – सेना – ब्रिगेड – मंडली – कमिटी – टोली – जाति – जात–पात – कौम – प्रजाति – भीड़ – पुलिस – नगरपालिका – संसद – राज्यसभा – विधानसभा – पाठशाला – बैठक – गोष्ठी
  9. सब्ज़ियों, पेड़ों और बर्तनों के स्त्रीलिंग नाम, जैसे:
    • बन्दगोभी – फूलगोभी – भिंडी – तुरई – मूली – गाजर – पालक – मेंथी – सरसों – फलियाँ – फराज़बीन – ककड़ी – शकरकन्दी।
    • नाशपाती – लीची – मौसंबी – खुबानी – अंजीर।
    • चमेली, बेली, जूही, अमलतास, इमली, बीही, कचनार, नरगिस, चिरौंजी, वल्लरी, लता, बेल, गूठी, नीम पौध – जड़ – बगिया, छुरी
    • भट्ठी – अँगीठी – बाल्टी – देगची – कटोरी – कैंची – थाली – चलनी – चक्की – थाल – तवा – नल।
  10. स्त्रीलिंग आभूषण, जैसे: आरसी – नथ – तीली माला, बाली – झालर – चूड़ी बिंदिया, पायल – अंगूठी – कंठी’ मुद्रिका।
  11. किराने की स्त्रीलिंग चीज़ें, जैसे: सोंठ – हल्दी – सौंफ – अजवायन – दालचीनी – लवंग (लौंग) – हींग – सुपारी – इलायची – मिर्च – कालमिर्च – इमली
  12. खाने–पीने के स्त्रीलिंग चीज़ें, जैसे: रोटी – रसा – खिचड़ी – पूड़ी – दाल – खीर – चपाती – चटनी – पकौड़ी – भाजी – सब्ज़ी तरकारी – काँजी – बर्फी – मट्ठी – बर्फ।
  13. स्त्रीलिंग वस्त्र, जैसे: चोली – अंगिया – जुर्राब – बंडी – गंजी – पतलून – कमीज – साड़ी – धोती – पगड़ी – चुनरी – निक्कर – बनियान – लँगोटी – टोपी

आम प्रयोग होने वाले पुल्लिंग शब्द

  1. रत्नों, धातुओं तथा द्रवों के नाम, जैसे: हीरा, पुखराज, पन्ना, नीलम, लाल, जवाहर, मूंगा, मोती, पीतल, ताँबा, लोहा, कांस्य, सीसा, एल्युमीनियम, प्लेटिनम, यूरेनियम, टीन, जस्ता, पारा, पानी, जल, तेल, सोडा, दूध, शर्बत, रस, जूस, कहवा, कोका, जलजीरा, आदि। [अपवाद यानी स्त्रीलिंग: सीपी, मणि, रत्ती, चाँदी, मद्य, शराब, चाय, कॉफी, लस्सी, छाछ, शिकंजवी, स्याही, बूंद, धारा आदि]।
  2. शरीर के अंग, जैसे: सिर, माथा, बाल, मस्तक, ललाट, कंठ, गला, हाथ, पैर, पेट, टखना, अंगूठा, फेफड़ा, कान, मुँह, ओष्ठ, नाखून, भाल, घुटना, मांस, दाँत आदि।
  3. पर्वतों, समयों, हिन्दी महीनों, दिनों, देशों, जल–स्थल, विभागों, ग्रहों, नक्षत्रों, मोटी–भद्दी, भारी वस्तुओं के नाम, जैसे: हिमालय, धौलागिरि, मंदार, चैत्र, वैसाख, ज्येष्ठ, सोमवार, मंगलवार, भारत, श्रीलंका, अमेरिका, लट्ठा, शनि, प्लूटो, सागर, महासागर आदि।
  4. कुछ प्राणिवाचक जोड़ों वाले शब्द नित्य पुंल्लिंग होते हैं मगर इन के स्त्रीलिंग–पुंल्लिंग रूप को स्पष्ट करने के लिए नर-मादा का प्रयोग करना पड़ता है, जैसे: नर चील, नर मक्खी, नर मैना, – मादा रीछ, मादा खटमल आदि।
    • गरुड़ – बाज़ – पक्षी
    • खग – विहग – कछुआ
    • मगरमच्छ – खरगोश – गैंडा
    • चीता – मच्छर – खटमल
    • बिच्छू – रीछ – जुगनू
  5. क्रियार्थक संज्ञाएँ: जब कोई क्रियावाची शब्द (अपने मूल रूप में) किसी कार्य के नाम के रूप में प्रयुक्त हो तब वह संज्ञा का काम करने लगता है। इसे ‘क्रियार्थक संज्ञा’ कहते हैं, जैसे:
    • नहाना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है।
    • टहलना हितकारी होता है।
    • गाना एक व्यायाम होता है।
  6. द्वन्द्व समास के समस्तपदों का प्रयोग पुल्लिंग बहुवचन में होता है।
    • मेरे माता–पिता आए हैं।
    • उनके भाई–बहन शहर में पढ़ते हैं।
  7. अंग्रेजी भाषा से आए पुल्लिंग शब्द, जैसे: टेलीफोन – टेलीविजन – रेडियो – स्कूल – स्टूडेंट – स्टेशन – पेन – बूट – बटन।
  8. अरबी–फारसी से आए पुल्लिंग शब्द, जैसे: हिसाब, मकान, मेजबान, बाजार, वक्त, जोश, जवाब, कबाब, इनसान, दरबान, दुकानदार, खत, कुदरत, कशीदाकार, जनाब, मेहमान, अखबार, मजा, होश, नवाब।
  9. प्राणियों के पुल्लिंग समूह, जैसे: परिवार – कुटुम्ब – संघ – दल – गिरोह – झुंड – समुदाय – समूह – मंडल – प्रशासन – दस्ता – कबीला – देश – राष्ट्र – राज्य – प्रान्त – मुलक – नगरनिगम – प्राधिकरण – मंत्रिमंडल – अधिवेशन – स्कूल – कॉलेज – विद्यापीठ – विद्यालय – विश्वविद्यालय।
  10. सब्ज़ियों, पेड़ों और बर्तनों के पुल्लिंग नाम, जैसे:
    • शलजम – अदरख – टमाटर – बैंगन – पुदीना – मटर – प्याज – आलू – लहसुन – धनिया – खीरा – करेला – कचालू – कद्दू – कुम्हड़ – नींबू – तरबूज़ – खरबूज़ा – कटहल – फालसा – पपीता – कीकर – सेब – बेल – जामुन – शहतूत – नारियल।
    • माल्टा – बिजौरा – तेंदू – आबनूस – चन्दन – देवदार – ताड़ – खजूर – बूटा – वन।
    • टब – पतीला – कटोरा – चूल्हा – चम्मच – स्टोव – चाकू – कप – चर्खा – बेलन – कुकर।
  11. पुल्लिंग आभूषण, जैसे: कंगन – कड़ा – कुंडल – गजरा – झूमर – बाजूबन्द – हार – काँटे – झुमका – कील – शीशफूल – आभूषण
  12. किराने की पुल्लिंग चीज़ें, जैसे: अदरक – जीरा – धनिया – मसाला – अमचूर – अनारदाना
  13. खाने–पीने के पुल्लिंग चीज़ें, जैसे: पराठा – हलवा – समोसा – भात – भठूरा – कुल्या – चावल – रायता – गोलगप्पे – पापड़ – लड्डू – रसगुल्ला – मोहनभोग – पेड़ – फुल्का।
  14. पुल्लिंग वस्त्र, जैसे: रूमाल – कुरता – पाजामा – कोट – सूट – मोजे – जांधिया – दुपट्टा – टोप – गाऊन – घाघरा – पेटीकोट।

कुछ ऐसे शब्द हैं, जो लिंग बदल जाने पर अर्थ भी बदल लेते हैं:

  1. उस मरीज़ को बड़ी मशक्कत के बाद कल मिली है। (चैन) – उसका कल खराब हो चुका है। (मशीन) – कल बीत जरूर जाता है, आता कभी नहीं। (बीता और आनेवाला दिन)
  2. मल्लिकनाथ ने मेघदूत की टीका लिखी। (मूल किताब की व्याख्या) – उसने चन्दन का टीका लगाया। (माथे पर बिन्दी) – उसने अपनी बहू को एक सुन्दर टीका दिया। (आभूषण)
  3. वह लकड़ी के पीठ पर बैठा भोजन कर रहा है। (पीढ़ा/आसन) – उसकी पीठ में दर्द हो रहा है। (शरीर का एक अंग) –
  4. सेठजी के कोटि रुपये व्यापार में डूब गए। (करोड़) – आपकी कोटि क्या है, सामान्य या अनुसूचित? (श्रेणी)
  5. कहते हैं कि पहले यति तपस्या करते थे। (ऋषि) – दोहे छंद में 11 और 13 मात्राओं पर यति होती है। (विराम)
  6. धार्मिक लोग मानते हैं कि विधि सृष्टि करता है। (ब्रह्मा) – इस हिसाब की विधि क्या है? (तरीका)
  7. उस व्यापारी का बाट ठीक–ठाक है। (बटखरा) – मैं कबसे आपकी बाट जोह रहा हूँ। (प्रतीक्षा) – पूर्व चलने के बटोही बाट की पहचान कर ले। (राह)
  8. चाकू पर शान चढ़ाया गया। (धार देने का पत्थर) – हमारे देश की शान निराली है। (इज़्ज़त)
  9. मेरे पास कश्मीर की बनी एक शाल है। (चादर) – उस पेड़ में काफी शाल था। (कठोर और सख्त भाग)
  10. मैंने एक अच्छी कलम खरीदी है। – मैंने आम का एक कलम लगाया है। (नई पौध)

लिंग–संबंधी कुछ रोचक और विचारणीय बातें:

यदि एक शब्द स्त्रीलिंग या पुल्लिंग है तो उस से मिलते जुलते शब्द भी उसी लिंग के होने चाहियें, जैसे:

  1. बाल पुल्लिंग है तो फिर दाढ़ी, मूंछ, और बाक़ी बाल जो आँख, नाक, भौंह, ढोड़ी आदि पर हैं वह स्त्रीलिंग क्यों हैं?!
  2. ऐसे ही दाढ़ी, मूंछ, जीभ सभी स्त्रीलिंग हैं और मुँह, कान, गाल, माथा, दाँत सभी पुल्लिंग!
  3. हाथ: पुल्लिंग, बाँह: स्त्रीलिंग, उँगली: स्त्रीलिंग, कलाई: स्त्रीलिंग, अंगूठा: पुल्लिंग!
  4. पैर: पुल्लिंग, जाँघ: स्त्रीलिंग, घुटना: पुल्लिंग, तलवा: पुल्लिंग, एड़ी: स्त्रीलिंग!

और अंत में: इस लेख में केवल एकवचन संज्ञाओं का वाक्य – प्रयोग बताया गया है। बहुवचन के लिए उसी के अनुसार संबंध (के-ने-रे) विशेषण एवं क्रिया (एकारान्त-ईकारान्त) लगाने चाहिए।


वाक्य द्वारा लिंग-निर्णय करने की कुछ विधियाँ हैं, जिनके लिंक नीचे दिये गए हैं:

  1. संबंध विधि
  2. विशेषण विधि
  3. क्रिया विधि
  4. कर्ता में ‘ने’ चिह्न लगाने की विधि

लिंग निर्धारण नियमों का सारांश

  1. ‘लिंग’ का शाब्दिक अर्थ प्रतीक या चिह्न अथवा निशान होता है।
  2. वैयाकरणों ने निम्न आधार पर कुछ लिंग निर्धारण नियम बनाए हैं:
    • विभिन्न साहित्यकारों और आम लोगों के भाषा-प्रयोग के आधार पर ।
    • शब्दों के रुप [यानी शब्दों की व्याकणिक बनावट]  के आधार पर ।
    • प्रयोग [यानी संज्ञा शब्द के साथ प्रयुक्त विशेषण, कारक चिह्न एवँ क्रिया के आधार पर]।
    • अर्थ के आधार पर
    • शब्दांत में कौन सा स्वर है, इस के आधार पर।
    • शब्द की रचना में किन प्रत्यय का प्रयोग हुआ है, उस के आधार पर।
  3. उभयलिंगी शब्दों का प्रयोग दोनों लिंगों में होता है।
  4. तत्सम एवं विदेशज शब्द हिन्दी में लिंग बदल चुके हैं।
  5. कुछ ऐसे शब्द हैं, जो लिंग बदल जाने पर अर्थ भी बदल लेते हैं।
  6. वाक्य द्वारा लिंग-निर्णय करने की कुछ विधियाँ हैं।
  7. हम किसी हिंदी शब्द का लिंग इसी आधार पर जान सकते हैं कि हम उसे कैसा लिखते, पढ़ते या सुनते रहे हैं।

स्त्रीलिंग पुल्लिंग

काका से कहने लगे ठाकुर ठर्रा सिंह
दाढ़ी स्त्रीलिंग है, ब्लाउज़ है पुल्लिंग
ब्लाउज़ है पुल्लिंग, भयंकर गलती की है
मर्दों के सिर पर टोपी पगड़ी रख दी है
कह काका कवि पुरूष वर्ग की किस्मत खोटी
मिसरानी का जूड़ा, मिसरा जी की चोटी।😜

उसी समय कहने लगे शेर सिंह दीवान
तोता – तोती की भला कैसे हो पहचान
कैसे हो पहचान, प्रश्न ये भी सुलझा लो
हमने कहा कि उसके आगे दाना डालो
असली निर्णय दाना चुगने से ही होता
चुगती हो तो तोती, चुगता हो तो तोता।😜

काका हाथरसी की लिखी यह कविता आगे यहाँ पढ़ें: काका हाथरसी


[यह लेख इस मूल लेख पर आधारित है: Gender/Ling in Hindi, आभार: Arti Rai]

कुछ और [मुहावरा, लोकोक्ति, हाइबुन, मात्रा गणना, इत्यादि] यहाँ देखें: हिन्दी मैंने यूँ सीखी



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